वाइल्डलाइफ कार्नर

रणथम्भौर फाउण्डेशन
सवाई माधोपुर
वृक्ष मित्रता

तर्ज
आओ बच्चों तुम्हें दिखाये झॉंकी हिन्दुस्तान की..,
आओ मित्रों तुम्हें बताये बात बडे ही ज्ञान की ।
वृक्षों से हम करे मित्रता ये है जान जहान की ।।
वृ़क्ष लगाये हम , बाघ बचाये हम……………… ।। 1 ।।
वृक्ष सदा पर हित ही जीता स्वारथ से अनजान सा ।
जड़ से पत्तों तक कर देता दान सदा भगवान सा ।।
वृक्षों की रक्षा में आज लगा दे बाजी प्राण की ।
वृक्षों से हम करे मित्रता ये है जान जहान की ।।
वृ़क्ष लगाये हम , बाघ बचाये हम……………… ।। 1 ।।
जन्म समय से अन्त समय तक पग-पग पर आता है काम ।
आक्सीजन का अचल खजाना तनिक नहीं लेता है दाम ।।
कलम किताब इसी की माया औषधी जीवन दान की ।
वृक्षों से हम करे मित्रता ये है जान जहान की ।।
वृ़क्ष लगाये हम , बाघ बचाये हम……………… ।। 2 ।।
ऊॅंच नीच और धर्म जाति का वृ़क्ष कभी ना करता भेद ।
सबको यह निज फल दे देता मन में कभी ना करता खेद ।।
इस समदरसी वृक्ष देव की पूजा हो भगवान सी ।
वृक्षों से हम करे मित्रता ये है जान जहान की ।।
वृ़क्ष लगाये हम , बाघ बचाये हम……………… ।। 3 ।।
जब भी अपना जन्म दिवस हो या हो दिन त्यौहार का ।
वृक्ष लगा कर खुशी मनाये परिचय दे हम प्यार का ।।
अटल मित्रता रहे हमेंषा वृक्ष और इन्सान की ।
वृक्षों से हम करे मित्रता ये है जान जहान की ।।
वृ़क्ष लगाये हम , बाघ बचाये हम……………… ।। 4 ।।
हनुमान प्रसाद वैष्णव
रणथम्भौर फाउण्डेशन
9784320031

अमृता का बलिदान (नाटक)

एक दरबारी – (ढोल पीटता हुआ आता है ) सावधान महाराज आ रहे है । महाराज पधार रहे है ।
(ठीक थोडी देर बाद एक राजा एवं दरबारी आ जाते है । और बोलते है )
दरबारी – महाराज की जय हो । महाराज की जय हो
राजा – (हाथ के इषारे से बैठाते है ) महामंत्री जी
महामन्त्री – जी महाराज
राजा – हमारे दुर्ग निर्माण का कार्य कितना शेष है
महामन्त्री – महाराज अभी आधा कार्य ही पूर्ण हुआ है
राजा – ऐसा क्यो
महामन्त्री – महाराज अभी हमारे पास लकडियों की कमी है ।
राजा – कहॉं मिलेगी लकडियां
महामन्त्री – महाराज आप के राज में ग्राम खेजडली के पास ही जंगल में खेजडी के बहुत पेड है ।
राजा – तो मंगवा लीजिए
महामन्त्री – पर महाराज उस गांव के लोग खेजडी की पूजा करते है । न स्वयं काटते है और न ही किसी को काटने देते है ।
राजा – (क्रोध में) महामन्त्री हमारे राजसी ठाठ और सुरक्षा में दखलन्दाजी बर्दास्थ नहीं की जायेगी उन मूर्ख गांव वालो को
पता नहीं है राजा की सेवा भी पूजा होती है । और राजा का आदेश वेद वाक्य होता है । जाओ और जितनी
आवष्यकता हो इतने पेड काट लो । यह हमारा आदेश है । ( इतना कह कर राजा सिंहासन से उठ कर चला
जाता है और महामन्त्री कुछ सिपाईयो को लेकर जंगल की ओर चले जाते है)
( सिपाही कदम ताल मिलाते हुए चलते है और गाते है )
राजा का आदेश है अपना सारा देश है । हम जंगल में जायेगें पेड काट कर लायेगें
( जंगल का दृश्य )
( जंगल में बहुत सारे वृक्ष है पेड पौधे हवा के झौंको से हिलते रहते है वन्य जीव स्वछन्द विचरण करते रहते है । राजा के
सिपाही जंगल के मन मोहक दृष्य को देख कर मस्त हो जाते है और भूल जाते है अपना गाना जंगल की तारीफ करने लगते है )
सिपाही नं 1 – वाह क्या जंगल है आनन्द आ गया
सिपाही नं 2- ऐसा मजा तो राज दरबार में भी नहीं है
सिपाही नं 3 – किसी ने ठीक ही कहा है कि वन बिना जीवन संभव ही नहीं है ।
सिपाही नं 4- अरे भैया हमें पेड भी काटने है
सभी – ओ हो हम तो भूल ही गये थे
( एक सिपाही पेड काटने को तैयार होता ही है तो एक महिला की आवाज आती है )
महिला – ठहरो ( और महिला नजदीक आजाती है )
सिपाही – कौन हो तुम क्या चाहती हो
महिला – मैं अमृता हूंॅ हम लोग विश्नोई है यह पेड हमारी धराडी है । ये हमारे देवता है हमें जान से भी प्यारे है
( सिपाही हॅंसते है )
सिपाही – अपना रास्ता नापो बुढिया महाराज का आदेश है हम पेड काटेगें ही ।
महिला – भैया ये पेड मत काटो मैं तुम्हारे पैर पडती हूॅं ( इसी दौरान कई गॉंव वाले आजाते है और सिपाइयों के पैर पकड लेते
है सिपाई उन को लात मार कर दूर कर देते है और पेड काटने के लिए कुल्हाडिया तान लेते है )
महिला – ठहरो पेड काटने से पहले तुम्हें हमें मारना होगा हम जान देकर भी पेड बचायेंगें यही हमारा धर्म है ।
( और वह पेड के चिपक जाती है ) देखते ही देखते सब गॉंव वाले पेडों के चिपक जाते है । तभी एक सिपाही अमृता
पर वार करता है /
महिला – पेड हमारी जान है ये सच्चे भगवान ह ै ( एक एक करके सभी लोग मर जाते है )
अमृता हुई बलिदानी
तर्जः- हे मेरे वतन के लोगो.ं……..
हे मेरे वतन के लोगो जरा याद करो वो कहानी
पेडों के लिए जॉं दे दी अमृता हुई बलिदानी
तुम भूल न जाओ उसको इसलिए पडी ये सुनानी
पेडो के लिए ………………………………………. ।। 1 ।।
थी वीर भूमी खेजडली भगवान थे तरू जंगल के
पूजा करते तन मन से गाते थे गीत मंगल के
खुश हाली थी जीवन में हर दिवस था इक दीवाली
पेडो के……………………………………………….।। 2 ।।
फरमान था नृप पापी का सैनिक ले आये कुल्हाडी
खेजडली वन विनास की पूरी करली तैयारी
बेबस थे लोग बेचारे षासन की थी मनमानी
पेडो के ………………………………………………. ।। 3 ।।
सब अनुनय विनय वृथा थी हत्यारे बाज न आये
वृक्षों पे कहर बरपाया तरू गिरने लगे धरा पे
धीरज का समन्दर टूटा बह चला दृगों से पानी
पेडों के ………………………………………………..।। 4 ।।
जब वृक्ष प्रेम उमडा तो अमृता ने तरू को पकडा
देखते देखते सब ने वन को बॉंहों में जकडा
दुश्टों को दया नहीं आई फिर खून बहा ज्यू पानी
पेडों के लिए……………………………………………. ।। 5 ।।
यह वृक्ष प्रेम की गाथा बन गई मिषाल जगत में
बलिदान व्यर्थ ना जाये ऐसा हो रगत रगों में
है धन्य अमृता देवी है धन्य तेरी वो कहानी
पेडों के लिए …………………………………………….।। 6 ।।
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हनुमान प्रसाद वैष्णव
रणथम्भौर फाउण्डेशन
9784320031

स्वागत गीत

ख्तर्जः मोरिया आच्छ्यो बोल्यो रे ढळती रात..,
पावणा भला ही पधार्या म्हारे ऑंगणे
पावणा भला ही पधार्या म्हारे ऑंगणे,ऑंगणे,ऑंगणे
ओ थॉंका आबा सूॅं आई रे बहार पावणा भला ही पधार्या….. ।। 1 ।।
पावणा पलकॉं बिछाउ थॉंका पंथ पे
पावणा पलकॉं बिछाउ थॉंका पंथ पे,पंथ पे,पंथ पे
ओ थॉंकी घणी घणी करूं मनवार पावणा भला ही पधारा्या…. ।। 2 ।।
पावणा रणत भॅंवर की धरती लाडली
पावणा रणत भॅंवर की धरती लाडली,लाडली,लाडली
ओ थॉंको ई धरती पे स्वागत बारंम्बार पावणा भला ही पधार्या…..।। 3 ।।
पावणा टाइगर बचाावा आपॉं डॉंग का
पावणा टाइगर बचावॉं आपा डॉंग का,डॉंग का ,डॉंग का
ओ म्हारो तन मन ई प जावे बलिहार पावणा भला ही पधार्या…. ।। 4 ।।
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हनुमान प्रसाद वैश्णव
रणथम्भौर फाउण्डेशन
9784320031

लाडली बेटी

छोटी सी न मत परणावे क्यूॅं तू मोसू बैर करे ।
लाडली बेटी मू थारी क्यू काका अब गैर करे ।।
बाळक छॅू मत ब्याव करे म्हन छाछ राबडी खाबा दे ।
म्हारी जोट की छोर्या लारे गीत सुरंगा गाबा दे ।।
लत्ता गाबा समटे कौनअ क्यू घूंघट को बोझ धरे ।
लाडली बेटी मूॅं थारी………………….. ।। 1 ।।
पढबा जाबा का दिन म्हारा खूॅंटा क क्यू बॉंधे तू ।
जीजी म्हारी झडा नटे छ अब जादा मत रॉंधे तू ।।
बहण भाई और गॉंव गुवाडी क्यू आख्यां सू दूर करें ।
लाडली बेटी मूॅं थारी………………….. ।। 2 ।।
सगळा कामा म काका मूॅं भाया आगे रूं छूं रे ।
काळो क्यू काटे तू म्हारो मूॅं तो सू या पूछु रे ।।
मूॅं क्यू थारे माथे चढगी क्यू म्हारो तू अणो करे ।
लाडली बेटी मूॅं थारी………………….. ।। 3 ।।
म्हारो मन मारे मत काका मौनअ आणन्द करबा दे ।
बरस अठारा तक ज्यामण को म्हन बेवडो भरबा दे ।।
कठ मत भींचे बालापण को तू म्हारी क्यू धूळ करे ।
लाडली बेटी मूॅं थारी………………….. ।। 4 ।।
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हनुमान प्रसाद वैष्णव
रणथम्भौर फाउण्डेशन
9784320031